shopify site analytics
Hindi / English
Living Feminisms
  • About
  • Features
  • .
  • Archive
  • Contact
Gallery

हमारी बात- महिला कलाकार

हम सबला (जुलाई-दिसंबर 2014)
by अनामिका
Article

न्याय का अन्याय: शालीशी अदालतें

by जयदीप मजूमदार
इस लेख में पश्चिम बंगाल के अवैध "शालीशी" अदालतों के देहशतगेज़ी की भीषण छवि प्रस्तुत की गई है। लेख में विभिन्न घटनाओं का वर्णन दिया गया है जिसमें ये अदालतें अपनी मनमर्ज़ी से फैसला लेती हैं। राज्य के भीतरी ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर काम कर रहीं ये अदालतें मृत्युदंड की सजा तक देती आई हैं। और तो और इन अदालतों द्वारा स्त्रियों के सर मुंडवाने, उन्हें निवस्त्र घूमाने, उनका सामूहिक बलात्कार किये जाने जैसी कड़ी सज़ाएं सामान्य है।
Article

प्रतिगामी राज्य

by ऋतू मेनन
इस लेख में वेंडी डोनिजर की पुस्तक "द हिन्दुस्: एन ऑलटरनॅटिवे हिस्ट्री" की बाजार में बिक्री पर रोक को एक उदाहरण के रूप में पेश करते हुए भारतीय दंड संहिता की 'सब लोगों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखने' के विचार से बनाई गई धारा '153 अ' व '295 अ' की अस्पष्टता पर टिप्पणी की गई है। सभी नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु इन कानूनों में सुधार अनिवार्य है।
Article

स्कूूलों में दलित- आदिवासी बच्चों का सच

by विमला रामचंद्रन/ तारामणी नाओरेम
इस लेख में प्रस्तुत है छः राज्यों (आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश व राजस्थान) के स्कूलों में गुणात्मक शोध अध्ययण के ज़रिये किये गए स्कूली अलगाव और शिरकत के निरिक्षण के निष्कर्ष।
Article

पुरुषों के लिए न्याय: मर्दानगी की नई व्याख्या

by हर्ष मंदर
जेंडर समानता के द्वारा दुनिया न केवल महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक होगी अपितु इन सबके साथ-साथ दुनिया अधिक दयालु, कम हिंसक तथा पुरुषों के लिए भी कम दबावपूर्ण बनेगी क्योंकि पितृसत्ता औरत व मर्द दोनों का दुश्मन है। अतः इस लेख में "मर्दानगी" को एक नए ढंग से परिभाषित करने की ज़रुरत पर ज़ोर दिया गया है।
Article

मुग़ल शहज़ादी- जहांआरा और जेब-उन-निसा

by रज़ा रूमी
"इस पितृसत्तात्मक समाज में औरतें यदा-कदा ही सत्ता और राजनीती के उच्च पदों पर आसीन हुई हैं।" ऐसी ही कहानी है शाहजहां की बेटी जहाँआरा की जो लगभग आधी सदी गुमनाम रहने के बाद मुग़ल दरबार में सत्ता के केंद्र में नज़र आई। अपने दौर में उन्होंने कला और साहित्य को बहुत बढ़ावा दिया। औरंगज़ेब की बेटी जेब-उन-निसा भी एक कला प्रेमी, शायरा और रचनात्मक तबियत वाली महिला थीं जिन्होंने अपने फिरकापरस्त पिता के धर्म और समाज से जुड़ी पारम्परिक सोच को अपनी कलम के माध्यम से लगातार चुनौती दी।

Pages

  • « first
  • ‹ previous
  • …
  • 48
  • 49
  • 50
  • 51
  • 52
  • 53
  • 54
  • 55
  • 56
  • next ›
  • last »

Share This Page

Concept: Jagori | Content: Amrita Nandy | Design: Avinash Kuduvalli
Development and Maintenance: Zenith Webtech

About Living Feminisms

Living Feminisms is an attempt to share archives preserved by Jagori, a New Delhi-based feminist organisation from the eighties. It offers subjective accounts by our curators as well as access to publications, songs, pamphlets, posters, photographs, poems etc. Together, they reflect the diverse spectrum that is the autonomous Indian women’s movement, its struggles, solidarities and differences, laughter, anger, carefree moments, campaigns, love, loss, work and home.

Disclaimer                   |                  Contact                  |                  Jagori

×

If you would like to access this resource, please email us at jagori@jagori.org

Kindly include the title of the resource you wish to access in your email. Our team will review your request and respond as soon as possible.