निजी और सियासी
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कमला भसीन ने एक समाज वैज्ञानिक के रूप में शिक्षा ली और वह पिछले 35 साल से भी ज़्यादा समय से विकास, शिक्षा, जेंडर, मीडिया और दूसरे संबंधित मुद्दों पर लगातार सक्रिय रही हैं। ग्रामीण एवं शहरी गरीबों के सशक्तिकरण पर उनकी सरगर्मियों की शुरुआत 1972 में राजस्थान में सक्रिय एक स्वैच्छिक संगठन के साथ हुई थी। इसके बाद वे युनाइटेड नेशन्स फूड ऐण्ड एग्रीकल्चरल ऑर्गेनाइज़ेशन (एफएओ) के एनजीओ दक्षिण एशिया कार्यक्रम से जुड़ी जहां उन्होंने 27 साल तक काम किया। इस दौरान उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया में हाशियाई तबकों, खासतौर से महिलाओं के विकास व सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे बहुत सारे स्वैच्छिक संगठनों को मदद दी।
फिलहाल वह संगत, जागोरी और जागोरी ग्रामीण के साथ काम कर रही हैं। इसके अलावा वह पीस वीमेन एक्रॉस दि ग्लोब की सहअध्यक्षा हैं और वन बिलियन राइजि़ंग की दक्षिण एशिया संयोजक हैं।
जेंडर, विकास, शांति, सैन्यीकरण, मानवाधिकार और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी गहरी सरगर्मियों के ज़रिए वह लगातार इन सवालों को समझने और व्यक्त करने में सक्रिय रही हैं और विभिन्न आंदोलनों के बीच तालमेल और साझेदारियों को बढ़ावा देती रही हैं।
बीते सालों के दौरान कमला भसीन जेंडर, टिकाऊ विकास और मानवाधिकारों पर सहभागी, अनुभव आधारित, क्षमतावर्धन कार्यशालाओं का संचालन और आयोजन करती रही हैं। ये कार्यशालाएं पुरुष एवं महिला कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नीति निर्माताओं, आला अफसरों, सांसदों, पुलिस अधिकारियों, संयुक्त राष्ट्र पदाधिकारियों आदि के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय एवं दक्षिण एशियाई स्तर पर आयोजित की जाती रही हैं।
जेंडर, महिला सशक्तिकरण, सहभागिता व टिकाऊ विकास, सहभागी प्रशिक्षण, मीडिया व संचार आदि सवालों पर कमला विस्तार से लिखती रही हैं। उनकी ज़्यादातर किताबें कार्यकर्ताओं और विकास के क्षेत्र में सक्रिय लोगों को ध्यान में रखकर लिखी गई हैं। साथ ही उन्होंने महिला आंदोलन के लिए बहुत सारे गीत और नारे तथा बच्चों के लिए किताबें भी लिखी हैं और विभिन्न आंदोलनों के लिए पोस्टर और बैनर भी बनाए हैं।
हालांकि कमला खुद को एक बढि़या गायक नहीं मानतीं, फिर भी वह जहां मौका मिलता है जोश और जज़्बे के साथ गाने से पीछे नहीं हटतीं।
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