shopify site analytics
Hindi / English
Living Feminisms
  • हमें जानें
  • हिंदी कहानी
  • .
  • पुरालेख
  • संपर्क
Article

उठो, नाचो, विरोध करो: उमड़ते सौ करोड़ अभियान के अनेक रुख

अभियान
by पामेला फिलिपोज़
2012 में दुनिया के अलग-अलग कोनों में महिला हिंसा के खिलाफ चल रहे संघर्षों को और मज़बूत व गतिशील बनाने के लिए शुरू हुआ एक वैश्विक अभियान है 'उमड़ते सौ करोड़'। 'उठो, नाचो, विरोध करो' के अपने नारे के साथ जिसमें शरीर खुद विरोध का एक प्रतीक बन जाता है, यह अभियान औरतों के लिए एक हिंसा मुक्त भविष्य की रचना के साथ-साथ साझे पुल बनाने के प्रति भी बचनबद्ध है।
Article

समय है स्त्रीद्वेषी सोच से जूझने का

आमने-सामने
by कल्पना शर्मा
इस लेख में महिला-पुरुष समानता के सन्दर्भ में स्थाई बदलाव की ज़रुरत पर ज़ोर दिया गया है जिसके लिए बदलाव चाहने वालों को भारतीय समाज में गहरे पैठे लैंगिक भेदभाव और स्त्रीद्वेषी सोच, जिनकी अभिव्यक्ति का एक रूप सामूहिक बलात्कार है, से लड़ना होगा।
Article

आज बारिश कल मूसलधार: भारत में महिला अधिकारों के पक्ष में बदलाव की हवा

by रूरी स्यालेन्द्रावती
निर्भया बलात्कार कांड के बाद छिड़ी भारत भर में विरोध प्रदर्शनों ने महिला अधिकारों के पक्ष में और शोषण के खिलाफ मांग की आग में चिंगारी का काम किया। प्रस्तुत लेख में पढ़िए कैसे दिल्ली के एक कुख्यात बलात्कार की पीड़िता बदलाव की प्रेरणा बनी।
Article

आख़िरकार अभिव्यक्ति का अधिकार है किसका ?

संवाद
by मृणाल पांडे
इस लेख में हिंसात्मक यौनिक दमन और अश्लील साहित्य (पोर्नोग्राफी) के आपसी सम्बन्ध पर प्रकाश डाला गया है क्यूंकि हर उम्र की महिला व बच्चों के साथ होने वाली घरेलु हिंसा और अन्य प्रकार के अमानवीय व्यवहार को सीखने और जायज़ ठहराने में अश्लील साहित्य का इस्तेमाल एक बहुत बड़ा कारक है।
Article

पितृसत्तात्मक नियंत्रण रेखा का विरोध

by कविता कृष्णन
निर्भया बलात्कार कांड के बाद तेज़ी से छिड़ी यौन हिंसा के विरुद्ध जारी जन आंदोलन पर कुछ शंकालु लोगों ने तोहमत लगाई की इससे जुड़े विरोधी दरअसल एक उत्तेजित भीड़ के खतरनाक जमावड़े हैं। औरतों व लड़कियों का अपने घरों से बाहर आकर बुलंद इरादों के साथ इस आंदोलन में शामिल होना पितृसत्ता द्वारा खींची गई औरतों पर नियंत्रण के दायरों को एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसी बात को उजागर करता है प्रस्तुत लेख।
Article

बलात्कार और कानून

संवाद
by सुनीता ठाकुर
भारत में बलात्कार से जुड़े सक्रिय कानून के मौजूद होने के बावजूद उनकी स्थिति बेमानी है क्योंकि हमारे समाज द्वारा महिलाओं को कानून का सही इस्तेमाल करने की समझ, ताकत और आज़ादी नहीं दी गई है। प्रस्तुत लेख में इसी बात पर टिप्पणी की गई है।

Pages

  • « first
  • ‹ previous
  • …
  • 37
  • 38
  • 39
  • 40
  • 41
  • 42
  • 43
  • 44
  • 45
  • …
  • next ›
  • last »

Share This Page

Concept: Jagori | Content: Amrita Nandy | Design: Avinash Kuduvalli
Development and Maintenance: Zenith Webtech

लिविंग फेमिनिज़्म्स

लिविंग फेमिनिज़्म्स नई दिल्ली स्थित नारीवादी संगठन जागोरी के पास अस्सी के दशक से सुरक्षित दस्तावेजों को साझा करने की एक चेष्टा है। इसमें हमारी क्यूरेटर्स के अनुभव, विभिन्न प्रकाशन, गीतों के संकलन, पर्चे, पोस्टर, फोटोग्राफ और कविताएं आदि विधि प्रकार की सामग्री शामिल है। ये दस्तावेज और अनुभव स्वायत्त भारतीय महिला आंदोलन, उसके संघर्षों, एकजुटताओं और मतभेदों, ठहाकों, गुस्सों, लापरवाही के पलों, अभियानों, मोहब्बत, नुकसान, काम और घर, सबकी एक विविधतापूर्ण शृंखला के दर्शन कराते हैं।

स्वघोषणा                  |                  संपर्क                  |                  जागोरी