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घरेलू कामगारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा

by टाइम्स ऑफ़ इंडिया
2010 में श्रम मंत्रालय ने गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों के लिए शुरू की गई 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना' को घरेलू कामगारों के लिए भी लागू करने का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने पेश किया था। प्रस्तुत है इसी से जुड़ा टाइम्स ऑफ़ इंडिया अखबार में छपा समाचार।
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आलो आंधारी

पुस्तक परिचय
by माधवी मेनन
प्रस्तुत है बेबी हालदार की आत्मकथा 'आलो आंधारी' (अँधेरे से उजाले की ओर) की समीक्षा। बेबी हालदार एक घरेलू कामगार हैं जिन्होंने आजीवन गरीबी, हिंसा व अन्य कठिनाइयों का सामना किया और बहुत संघर्ष करने के बाद आखिरकार एक लेखिका के रूप में खुद के लिए जगह बनाने में कामयाब हुई। मूल रूप से बंगाली में लिखी गई यह आत्म-जीवनी पहले हिंदी में प्रकाशित हुई। कुछ सालों बाद उर्वशी बुटालिा द्वारा अंग्रेजी में अनूदित 'अ लाइफ लेस्स ऑर्डिनरी' नाम से प्रकाशित हुई। इसके उपरांत इस पुस्तक का अनेक भारतीय व विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया गया है।
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छोटी सी शुरुआत

संवाद
by मेवा भारती
मेवा भारती जयपुर की एक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने घरेलू कामगार महिलाओं को संगठित होने की प्रेरणा दी। इस लेख में उन्होंने 'राजस्थान महिला कामगार यूनियन' की शुरुआत के दौरान अपने अनुभव हमारे साथ बांटने का प्रयास किया है।
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अस्तित्व के बढ़ते कदम

आमने-सामने
by दीपा गुप्ता व नूपुर बहुखंडी
पढ़िए देहरादून की 'अस्तित्व' समूह के बारे में जिसका उद्देश्य है निम्न आय वाली कामगार महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण। चूंकि 'अस्तित्व' से जुड़ने वाली महिलाएं ज़्यादातर घरों में काम करती हैं लिहाज़ा समूह के काम में कुछ ऐसी विशेष गतिविधियाँ शामिल हैं जो घरेलू कामगारों को मद्देनज़र रखकर चलाई जा रही है जैसे घरेलू कामगार समूहों का संगठन, उनके लिए रोज़गार व्यवस्था, उनके बच्चों के लिए बालवाड़ी आदि।
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घरेलु कामगार मंच

आमने-सामने
by सि. रंजीता
पढ़िए प्रस्तुत लेख में 'घरेलू कामगार मंच' के बारे में जिसका लक्ष्य है घरेलू कामगारों के शोषण और महानगरों में औरतों व बच्चों के अवैध व्यापर की रोकथाम।
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दीक्षा

कहानी
by पी. सत्यावती
पढ़िए पि. सत्यावती की लिखी कहानी 'दीक्षा'। इस कहानी के प्रसंग में कुछ पृष्ठभूमि की जानकारी- केरल के सबरीमलै पहाड़ पर स्थित अय्यप्पा स्वामी की 40 दिन की दीक्षा के आरम्भ में काले कपड़ों के साथ माला पहनी जाती है जिसे माला लेना कहते हैं। दीक्षा के दौरान खान-पान और व्यवहार में संयम के साथ ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। साधारण आर्थिक स्थिति के लोग, जो अय्यप्पा के मंदिर नहीं जा सकते, वे भवानी की दीक्षा लेते हैं और विजयवाड़ा में स्थित देवी के मंदिर जाते हैं। दीक्षा के नियम दोनों में सामान है।

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लिविंग फेमिनिज़्म्स

लिविंग फेमिनिज़्म्स नई दिल्ली स्थित नारीवादी संगठन जागोरी के पास अस्सी के दशक से सुरक्षित दस्तावेजों को साझा करने की एक चेष्टा है। इसमें हमारी क्यूरेटर्स के अनुभव, विभिन्न प्रकाशन, गीतों के संकलन, पर्चे, पोस्टर, फोटोग्राफ और कविताएं आदि विधि प्रकार की सामग्री शामिल है। ये दस्तावेज और अनुभव स्वायत्त भारतीय महिला आंदोलन, उसके संघर्षों, एकजुटताओं और मतभेदों, ठहाकों, गुस्सों, लापरवाही के पलों, अभियानों, मोहब्बत, नुकसान, काम और घर, सबकी एक विविधतापूर्ण शृंखला के दर्शन कराते हैं।

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