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सवयसेवी संगठनों से स्त्रियों का विकास

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" महिला मंडल औरतो की समस्याओं को भले ही हल न कर पाए पर उनकी समस्याओं को उभारने, उन्हें नए ढंग से सोचने , उनमे बरोसा पैदा करने, उन्हें उनका महत्त्व समझने और उन्हें संगठन की ताकत का एहसास कराने के काम तो कर ही रहे हैं । ... बिना संगठित हुए स्त्रियां घर और समाज में अपनी स्थिति नहीं सुधार सकेंगी । महिला संगठन उन्हें सहारा और सहानुभूति दे रहे हैं । " आगे पढ़िए...
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अनपढ़ औरतो ने वीडियो फिल्म बनाना सीखा

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" ज्योतिबेन का मानना हैं कि जब औरते वीडियो फिल्म बनाएगी तब उनकी बात दूर - दूर तक पहुंचेगी । यह बहुत असरदार माध्यम हैं । इससे वे अपनी आवाज़ उठा सकेंगी और नीति बनाने वालों तक पहुँच सकेंगी । " आगे पढ़िए...
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शिविर और कार्यशाला

by सुहास कुमार
" आखिर में स्त्रियां सवाल करती हैं कि उन्हें क्यों दबाया जाता हैं? कभी धर्म तो कभी समाज, कभी राजनीति तो कभी घर से बड़े - बूढ़े उन्हें दबाते रहे हैं । क्यों? " आगे पढ़िए...
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जो दीवार पर लगे - लगे बात कहे- पोस्टर

by कमला भसीन
" पोस्टर हर तरह के होते हैं लेखिन अच्छा पोस्टर वह हैं जिसमे सन्देश छोटा व साफ हो । पोस्टर ऐसा बन होना चाहिए कि वह लोगों का ध्यान अपनी तरह खींचे , कोई उसे देखे और पढ़े बिना आगे जा ही न सके । अच्छा पोस्टर हमे सोचने को भी मज़बूर करता हैं, बातचीत या बहस के लिए बुलावा देता हैं ।... इसलिए अच्छा पोस्टर बनाने से पहले जिस विषय पर पोस्टर बनना हैं उसके बारे में गहराई से सोचना ज़रूरी हैं । " आगे पढ़िए ...
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हमारी बात आप तक आपकी बात हम तक यही संचार हैं

by सुहास कुमार
" संचार का मतलब हैं अपनी बात दूसरों तक पहुंचना । इसमें दो पक्ष होते हैं। एक कहने वाला, दूसरा सुनने वल्ला सुनने वाले की प्रतिक्रिया जानना ज़रूरी हैं, क्यूंकि जब तक हम यह नहीं जानेंगे हमे कैसे पता चल पाएगा कि बात सुनने वाले तक पहुंची या नहीं । मौजूदा संदभॅ में जब तक हम यह नहीं जानेंगे कि श्रापको संचार का मतलब समझ में श्राया या नहीं , तब तक संचार अधूरा रहेगा । " आगे पढ़िए ...
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संचार माध्यमों में औरतें

by वीणा शिवपुरी
संचार माध्यम लोगों तक लोगों की ज़ुबान में उन्हीं की समस्याओं के हल और सुझाव पहुँचाने का ताकतवर ज़रिया है इसलिए ज़रूरी है कि महिलाओं के विकास में उनका भरपूर उपयोग किया जाए। आगे पढ़िए...

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लिविंग फेमिनिज़्म्स

लिविंग फेमिनिज़्म्स नई दिल्ली स्थित नारीवादी संगठन जागोरी के पास अस्सी के दशक से सुरक्षित दस्तावेजों को साझा करने की एक चेष्टा है। इसमें हमारी क्यूरेटर्स के अनुभव, विभिन्न प्रकाशन, गीतों के संकलन, पर्चे, पोस्टर, फोटोग्राफ और कविताएं आदि विधि प्रकार की सामग्री शामिल है। ये दस्तावेज और अनुभव स्वायत्त भारतीय महिला आंदोलन, उसके संघर्षों, एकजुटताओं और मतभेदों, ठहाकों, गुस्सों, लापरवाही के पलों, अभियानों, मोहब्बत, नुकसान, काम और घर, सबकी एक विविधतापूर्ण शृंखला के दर्शन कराते हैं।

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