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पहली सती
by विजी श्रीनिवासन की कहानी पर आधारित
"वो अपनी पति के साथ चिता पर बैठ गई । उसकी नज़र मुझसे मिली उसने मेरी तरह हाथ फैलाए । .... मैंने अपनी बच्ची को धोखा दिया । मैंने आने वाली पीढ़ियों की औरतों के साथ धोखा दिया । " आगे पढ़िए...
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क्या परिवार अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहा हैं
by रेणुका पामेचा
अगर हमें स्वस्थ समाज की रचना करनी हैं तो परिवार के ढांचे में आई विसंगतियों की चर्चा ज़रूरी हैं । बेटियों को घुटने -मरने से बचाना हैं तो परिवार की भूमीका की चर्चा ज़रूरी हैं । परिवार के भीतर की हिंसा समाज व व्यस्था कि हिंसा से ज़्यादा खतरनाक हैं ।" आगे पढ़िए...
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एक साझी लड़ाई
by वीणा शिवपुरी
" भंवरी की लड़ाई हम सबकी लड़ाई हैं । और एक लम्बी लड़ाई हैं । एक प्रदर्शन इस लड़ाई की शुरुवात भले ही हो, अंत नहीं हैं । जब तक इस देश का कानून भंवरी को न्याय नहीं देता, जब तक सरकार यौन अत्याचार के खतरे को स्वीकार करके निथिरित परिवर्तन नहीं लगती, यह संघषॅ जारी रहेगा । " आगे पढ़िए...
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क्या माँ-बाप बेकसूर हैं?
by वीणा शिवपुरी
"पहली बात तो यही हैं कि जन्म से लेकर मृत्य तक पुरे खानदान कि इज़्ज़त का भोज औरतों पर ही क्यों डाला जाता हैं? चाहे वह बेटी हो या बहू । मर्द बले ही कुछ भी करते रहे इज़्ज़त को आंच नहीं आती । ".... आगे पढ़िए...
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औरतों के खिलाफ : पारिवारिक हिंसा
by वीणा शिवपुरी
" घर घर में रामशान घाट हैं घर घर में फांसी घर हैं घर घर में दीवारे हैं दीवारों से टकरा कर गिरती हैं वह गिरती हैं आधी दुनिया सारी मनुष्यता गिरती हैं ।" आगे पढ़िए...
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बाल- विवाह का कलंक मिटाएं
by रेणुका पामेचा
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