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वर्मा आयोग के सुझाव

अभियान
by
महिलाओं के प्रति बढ़ते यौन अपराधों और आपराधिक कानून में संशोधन की मांग के चलते सरकार के दिसंबर 2012 में वर्मा आयोग का गठन किया। समस्त देश के लगभग सत्तर हज़ार सुझावों, नागृक समूहों, कार्यकर्ताओं और अन्य पणधारियों के साथ विचार विमर्श के बाद समिति ने एक सशक्त सुझाव सामने रखे जिनमें से प्रमुख प्रस्तावों को प्रस्तुत लेख में सूचीबद्ध किया गया है।
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राशिदा मांजू का व्यक्तव्य

अभियान
by रशीदा मांजू
संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक राशिदा मांजू ने महिला हिंसा पर अपने इस व्यक्तव्य में भारत से दण्डमुक्ति, असमानता और भेदभाव की संस्कृति ख़त्म करने की मांग रखी ताकि महिलाओं के खिलाफ हिंसा को जड़ से मिटाया जा सके।
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महिला संगठनों द्वारा यौन हिंसा व मृत्युदंड विरोधी व्यक्तव्य

अभियान
by महिला संगठनों व प्रगतिशील समूहों के सदस्यगण
यह व्यक्तव्य समस्त देश के ज़िम्मेदार नागरिकों द्वारा दिसंबर 2012 में घटित निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या कांड के बाद दर्ज किया गया जिसमें इन्साफ की मांग करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया गया कि बलात्कार व यौन हिंसा के अन्य रूप केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं है, यह एक राजनैतिक मुद्दा है जिससे हर नागरिक का सरोकार होना चाहिए। इस न्याय की मांग में मृत्युदंड कदापि शामिल नहीं है अपितु इसमें विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए मृत्युदंड के प्रावधान की मुख़ालफ़त की गई है।
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उठो, नाचो, विरोध करो: उमड़ते सौ करोड़ अभियान के अनेक रुख

अभियान
by पामेला फिलिपोज़
2012 में दुनिया के अलग-अलग कोनों में महिला हिंसा के खिलाफ चल रहे संघर्षों को और मज़बूत व गतिशील बनाने के लिए शुरू हुआ एक वैश्विक अभियान है 'उमड़ते सौ करोड़'। 'उठो, नाचो, विरोध करो' के अपने नारे के साथ जिसमें शरीर खुद विरोध का एक प्रतीक बन जाता है, यह अभियान औरतों के लिए एक हिंसा मुक्त भविष्य की रचना के साथ-साथ साझे पुल बनाने के प्रति भी बचनबद्ध है।
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समय है स्त्रीद्वेषी सोच से जूझने का

आमने-सामने
by कल्पना शर्मा
इस लेख में महिला-पुरुष समानता के सन्दर्भ में स्थाई बदलाव की ज़रुरत पर ज़ोर दिया गया है जिसके लिए बदलाव चाहने वालों को भारतीय समाज में गहरे पैठे लैंगिक भेदभाव और स्त्रीद्वेषी सोच, जिनकी अभिव्यक्ति का एक रूप सामूहिक बलात्कार है, से लड़ना होगा।
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आज बारिश कल मूसलधार: भारत में महिला अधिकारों के पक्ष में बदलाव की हवा

by रूरी स्यालेन्द्रावती
निर्भया बलात्कार कांड के बाद छिड़ी भारत भर में विरोध प्रदर्शनों ने महिला अधिकारों के पक्ष में और शोषण के खिलाफ मांग की आग में चिंगारी का काम किया। प्रस्तुत लेख में पढ़िए कैसे दिल्ली के एक कुख्यात बलात्कार की पीड़िता बदलाव की प्रेरणा बनी।

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लिविंग फेमिनिज़्म्स

लिविंग फेमिनिज़्म्स नई दिल्ली स्थित नारीवादी संगठन जागोरी के पास अस्सी के दशक से सुरक्षित दस्तावेजों को साझा करने की एक चेष्टा है। इसमें हमारी क्यूरेटर्स के अनुभव, विभिन्न प्रकाशन, गीतों के संकलन, पर्चे, पोस्टर, फोटोग्राफ और कविताएं आदि विधि प्रकार की सामग्री शामिल है। ये दस्तावेज और अनुभव स्वायत्त भारतीय महिला आंदोलन, उसके संघर्षों, एकजुटताओं और मतभेदों, ठहाकों, गुस्सों, लापरवाही के पलों, अभियानों, मोहब्बत, नुकसान, काम और घर, सबकी एक विविधतापूर्ण शृंखला के दर्शन कराते हैं।

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