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असगरी बाई- सन्नाटे का सुर-पंचम

फिल्म समीक्षा
by सीमा श्रीवास्तव
प्रस्तुत है 86 वर्षीय एक मात्र ध्रुपद गायिका असगरी बाई के जीवन पर केंद्रित फिल्म 'असगरी बाई- सन्नाटे का सुर- पंचम' की समीक्षा।
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पंडवानी- इतिहास की कसौटी पर वर्त्तमान को तोलती कला

आमने- सामने
by सुनीता ठाकुर
पाण्डवानी छत्तीसगढ़ की एक लोककला है जिसके अंतर्गत एक पौराणिक कथा के माध्यम से जीवन के मर्म और तथ्यों माँ मूल्यांकन किया जाता है। इस कला को अपनाने वाली दो जानी-मानी कलाकार हैं तीजनबाई और ऋतू वर्मा- पढ़िए उनके बारे में।
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सर्कस की 'नई' दुनिया की झलकियाँ

संवाद
by मैरी-ऐन्द्री रौबितैल
मारी-एंड्री इस संवाद में सर्कस की दुनिया के साथ अपने जुड़ाव के बारे में बताती हैं। साथ ही वे अपनी गाइनॉइड्स परियोजना की शुरुआत के बारे में भी साझा करती हैं जिसका उद्देश्य सर्कस के परिवेश में औरतों की वैकल्पिक भूमिकाओं को बढ़ावा देना और नारीवादी कार्यनीतियां लागु करना है।
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हंसा वाडेकर- रंगमंच व मराठी फिल्म अभिनेत्री

आमने- सामने
by नगमा जावेद मालिक
रंगमंच व मराठी फिल्म अभिनेत्री हंसा वाडेकर न केवल एक बेहतरीन कलाकार थीं अपितु एक कलमकार भी थीं। उनकी निजी जीवन अत्यंत संघर्षरत और नाखुश थी जिसकी व्याख्या उन्होंने अपनी आत्मकथा "मैं कहती हूँ, तुम सुनो" में किया है। श्याम बेनेगल की फिल्म "भूमिका" हंसा के जीवन पर आधारित एक प्रभावशाली कहानी है।
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अलविदा ज़ोहरा आपा

यादगार
by गौहर रज़ा
ज़ोहरा सेगल का खिलखिलाता चेहरा, उनकी चुलबुली आवाज़, उनकी प्यार भरी आँखें, उनका अनोखा व जादू भरा अंदाज़- उनकी कई खूबियों में से कुछ हैं। अपनी प्रतिभा और सादगी के ज़रिये सभी के दिलों में बस्ने वाली ज़ोहरा आपा 102 साल की उम्र में ईश्वर को प्यारी हो गईं। इस यादगार में गौहर रज़ा ज़ोहरा आपा के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हैं।
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बिंदिया- मेरी दोस्त, मेरी हमसफ़र

यादगार
by कमला भसीन
कमला के शब्द और बिंदिया के चित्रों की प्रेरणादायक विरासत अतुलनीय है। बतौर 'यादगार' एक दोस्त के कलम से निकले ये अलफ़ाज़ और इन सफ़ों को सजाने वाले तमाम कलाकृतियां जागोरी की सबसे रचनात्मक जोड़ी- कमला भसीन व बिंदिया थापर- की सृजनात्मक साझेदारी की एक छोटी सी झलक है।

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लिविंग फेमिनिज़्म्स

लिविंग फेमिनिज़्म्स नई दिल्ली स्थित नारीवादी संगठन जागोरी के पास अस्सी के दशक से सुरक्षित दस्तावेजों को साझा करने की एक चेष्टा है। इसमें हमारी क्यूरेटर्स के अनुभव, विभिन्न प्रकाशन, गीतों के संकलन, पर्चे, पोस्टर, फोटोग्राफ और कविताएं आदि विधि प्रकार की सामग्री शामिल है। ये दस्तावेज और अनुभव स्वायत्त भारतीय महिला आंदोलन, उसके संघर्षों, एकजुटताओं और मतभेदों, ठहाकों, गुस्सों, लापरवाही के पलों, अभियानों, मोहब्बत, नुकसान, काम और घर, सबकी एक विविधतापूर्ण शृंखला के दर्शन कराते हैं।

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